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  • भारत का संसद भवन  – परंपरा और आधुनिकता का अद्वितीय संगम!”

    भारत का संसद भवन – परंपरा और आधुनिकता का अद्वितीय संगम!”

    संसद भारत के लोकतंत्र का प्रतीक है और यह देश की जनता की संप्रभुता को प्रतिष्ठित करने का महत्वपूर्ण स्थान है। संसद के माध्यम से भारतीय नागरिक अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से लोकप्रिय संप्रभुता का प्रयोग करते हैं और राजनीतिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

    संसद में निर्धारित सदनों के द्वारा विभिन्न मुद्दों पर बहस होती है और कानून बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। यहां पर सार्वभौमिक मताधिकार, एक-व्यक्ति एक-वोट के सिद्धांत, और राष्ट्रीय और भाषाई विविधता की मान्यता के माध्यम से सभी नागरिकों की राजनीतिक समानता को सुनिश्चित किया जाता है।

    संसद की महत्वपूर्ण भूमिका यह है कि यहां पर विभिन्न विचारों और मतों का समग्र विमर्श होता है, जो एक समान समाधान तक पहुंचने में मदद करता है। यहां पर नये विचारों को स्वागत मिलता है और उन्हें ध्यान में रखते हुए नये कानूनों और नीतियों का निर्माण होता है।

    संसद की यह संप्रभुता और लोकप्रियता बनाए रखने के लिए जरूरी है कि यह नागरिकों के मसीहा के रूप में कार्य करे और उनके हित में निर्णय लें।

    इस प्रकार, संसद भारत की लोकतंत्रिक संरचना का प्रतीक है और नागरिकों की संप्रभुता और सशक्तिकरण को प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    पुराने और नए संसद भवन में मूलभूत अंतर

    1. उम्र और ऐतिहासिकता:
      • पुराना संसद भवन: 100 साल पुराना, इतिहास से भरपूर!
      • नया संसद भवन: नया, आधुनिक और प्रगतिशील!
    2. डिजाइन और स्थापत्य:
      • पुराना संसद भवन: अस्थायी संशोधनों की वजह से थोड़ा पुराना रूप!
      • नया संसद भवन: ट्रायंगल डिजाइन, नए और आकर्षक!
    3. सीटिंग क्षमता:
      • पुराना संसद भवन: सीटों की कमी, छोटी-मोटी जगह, संयुक्त सत्रों में दिक्कतें!
      • नया संसद भवन: बढ़ी सीटिंग, बड़ी रूम, सभी संसद सदस्यों के लिए स्थान!
    4. सुविधाएं:
      • पुराना संसद भवन: कुछ सुविधाएं कम, कुछ आधुनिकता की जरूरत!
      • नया संसद भवन: हाईटेक सुविधाएं, आरामदायक कमरे, आधुनिक कैफे!
    5. संविधान हॉल:
      • पुराना संसद भवन: संविधान का गौरव, नया ध्यान नहीं!
      • नया संसद भवन: विशेष संविधान हॉल, गर्व के साथ महान नेताओं की तस्वीरें!
    6. सुरक्षा:
      • पुराना संसद भवन: अग्नि सुरक्षा और सुरक्षा की चिंता!
      • नया संसद भवन: आधुनिक सुरक्षा, बढ़ी सुरक्षा, हमारी प्राथमिकता!
    7. भविष्य के विस्तार के लिए:
      • पुराना संसद भवन: बढ़ती संसद सदस्यों के लिए कम स्थान!
      • नया संसद भवन: भविष्य के लिए बढ़ती स्थान की आवश्यकता!

    नये संसद भवन का उद्घाटन काफी शानदार और गर्वपूर्ण समारोह में हुआ है। यह नया भवन 64,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में बना है। इसमें लोकसभा कक्ष में 888 सीटें हैं, जहां हमारे प्रतिष्ठित सांसदों के लिए एक गरिमापूर्ण स्थान है।

    जब संयुक्त सत्र होता है, तो यह क्षमता 1,272 सदस्यों तक बढ़ जाती है, जो सद्भाव और सहयोग को बढ़ावा देता है।

    राज्यसभा कक्ष में 384 सीटें हैं, जहां उच्चसदन के महानुभावी सदस्य बैठते हैं, जहां समय समय पर महत्वपूर्ण चर्चाएं और निर्णय लिए जाते हैं।

    सरकार के मंत्रिपरिषद के उपयोग के लिए 92 कमरे मौजूद हैं, जो गवर्नेंस में निर्णय लेने के लिए महत्वपूर्ण स्थान हैं।

    इसके अलावा, नये संसद भवन में पुराने भवन की तुलना में 6 समिति कक्ष हैं, जो मुद्दों की सजगता और विचारों की विचारधारा को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। पुराने भवन में केवल 3 समिति कक्ष होती थीं।

    उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 75 रुपये की विशेष डाक मुहर जारी की है, जो हमारे गर्व और लोकतंत्र के निर्माण में समर्पण का प्रतीक है।

    सारांश के रूप में, नया संसद भवन पुरानी संरचना की सीमाओं से मुक्त होकर, संवेदनशीलता के साथ आधुनिक सुविधाएं, आधुनिक सुविधाएं, राष्ट्र की प्रगति और समावेशी शासन के प्रतीक के रूप में भारत के समर्पण को प्रदर्शित करता है।