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  • एक अद्भुत  ब्रह्मांडिक घटना जो खोल देगी इन राशियों के सुख समृद्धि और लंबे जीवन का मार्ग

    एक अद्भुत  ब्रह्मांडिक घटना जो खोल देगी इन राशियों के सुख समृद्धि और लंबे जीवन का मार्ग

    आयुष्मान योग: लंबी जीवन, सुख और समृद्धि का मार्ग  इन 3 राशियों के लिए!

    आयुष्मान योग, 27 योगों में तीसरा योग है। इसका प्रभाव आमतौर पर “लंबी आयु वाला” या लंबी जीवन वाला वर्णन किया जाता है

    आयुष्मान योग को सबसे शुभ योग माना जाता है। चंद्रमा सत्तारूढ़ भगवान की उपाधि रखता है, केतु शासक ग्रह है।

    आयुष्मान योग के दौरान जन्मे जाने वाले व्यक्ति को लंबी जीवन की प्राप्ति होती है, जिसका मतलब है कि उसे औसत तुलना में दूसरे लोगों की तुलना में अधिक समय और खुशहाल जीवन का आनंद मिलेगा।

    ऐसे व्यक्ति विभिन्न पकवानों का शौकीन हो सकते हैं और यात्रा करने के लिए प्यार कर सकते हैं। उन्हें कविता और संगीत में रुचि हो सकती है और वे अपना पेशा भी इन क्षेत्रों में चुन सकते हैं।

    वे अपने काम में बहुत संकल्पित होते हैं और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासशील होते हैं। वे शारीरिक रूप से मजबूत होते हैं।

    मेष राशि: ऐश्वर्य पूर्ण होगा।

    कर्क राशि: ज्ञान और शिक्षा में सफलता।

    वृश्चिक राशि: वित्तीय स्वतंत्रता और प्रोफेशनल सफलता।

    यह तीन राशियां ज्योतिष द्वारा कहे गए आयुष्मान योग के तहत आनंद, समृद्धि और लंबी जीवन की वरदान प्राप्त करती हैं। आइए, हम इस ब्लॉग में आयुष्मान योग के तहत जन्मे व्यक्तियों की विशेषताओं को जानें और जांचें कि यह कैसे तीन विशेष राशियों पर प्रभाव डालता है: मेष, कर्क और वृश्चिक।

    आयुष्मान योग के दौरान जन्मे व्यक्तियों की विशेषताएं में विविधता खोजने वाले व्यंजनों से प्यार, यात्रा करने का शौक और काव्य और संगीत में रुचि शामिल हैं।

    इन क्षेत्रों में व्यापार करने वाले व्यक्तियों के रूप में इन्होंने इन्हें अपना कार्य चुना है, जो उनकी अटूट संकल्पना, दृढ़ता और शारीरिक मजबूती के साथ संगत है।

    मेष राशि के लोगों के लिए, आयुष्मान योग कार्य और करियर में उद्यम के लिए अद्भुत लाभ लाएगा। जो भी लोग जन्मकुंडली के माध्यम से आयुष्मान योग का निर्माण करते हैं, उन्हें इस दिन उच्च लाभ होगा।

    उनके कार्यस्थल पर उनकी प्राधिकारियां काफी प्रभावित होंगी और उनके लिए नई संभावनाएं खुलेंगी, जो उनके करियर को और उन्नत करने के लिए मददगार होंगी।

    मेष राशि में इन्हें प्राकृतिक शक्ति और शक्ति हासिल होती है, इसलिए यह उनकी सफलता के लिए निश्चित रूप से सहायक होगा।

    कर्क राशि के जातक, विशेष रूप से जब उनके जन्मकुंडली में एक अच्छी दशाओ वाली गुरु की होती है, तो आयुष्मान योग से अत्यंत लाभान्वित होंगे।

    कर्क राशि में गुरु की उच्चता और चंद्रमा के प्रभाव के कारण यह आशीर्वाद औरते हैं। यदि कोई व्यक्ति शिक्षा क्षेत्र में या रहस्यवादी विज्ञान में संलग्न है, तो उसे इस योग के द्वारा अत्यधिक आशीर्वाद प्राप्त होगा और इस योग के दौरान किए गए कोई भी प्रयास सफल होंगे।

    ज्ञान का कारक गुरु कर्क राशि के जातकों को अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए, आयुष्मान योग जीवन के विभिन्न पहलुओं में समृद्धि लाता है। वे न केवल एक लंबी जीवन का आनंद उठाते हैं, बल्कि चंद्रमा वृश्चिक राशि के लिए 9वें भाव के स्वामी बन जाता है।

    आर्थिक स्वतंत्रता और लाभ उनके हाथ में होते हैं और वे अपने व्यापार में अच्छा विकास करते हैं, अपनी बुद्धिमत्ता और ज्ञान का उपयोग करके। वे अपने संसाधनों और सामाजिक नेटवर्क का लाभ उठाते हैं और पेशेवर विकास और सकारात्मक करियर समाचार प्राप्त कर सकते हैं।

    आयुष्मान योग की शक्ति के साथ, इन तीन राशियों पर लंबी आयु, सुख और समृद्धि का वरदान है, जो एक ब्रह्मांडिक घटना है और खोजने लायक है। हमसे जुड़ें इस परिवर्तनकारी यात्रा में और जीवन के सुख-शांति की ओर बढ़ें!

  • ग्रहों की दृष्टि

    ग्रहों की दृष्टि

    ब्रह्मांड में ग्रहों की दृष्टि होती है। प्रत्येक ग्रह अपनी स्थिति से अन्य राशि या राशियों पर या उस राशि-स्थित ग्रहों पर दृष्टि डालता है। इसका मतलब है कि प्रत्येक ग्रह का चमकता हुआ प्रकाश राशि चक्र के किसी न किसी खंड पर पड़ता है, जिसे हम दृष्टि कहते हैं।

    इसलिए सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि ग्रहों की स्थित राशि से सप्तम राशि पर पूर्ण दृष्टि होती है। इसके अलावा, मंगल को चतुर्थ और अष्टम राशियों पर भी पूर्ण दृष्टि होती है।

    वृहस्पति को नवम और पंचम राशियों पर भी पूर्ण दृष्टि होती है और शनि को तृतीय और दशम राशि पर पूर्ण दृष्टि होती है। इसका मतलब है कि सूर्य, चंद्रमा, बुध और शुक्र की अपनी स्थिति से केवल सप्तम राशि में ही पूर्ण दृष्टि होती है।

    मंगल की चतुर्थ, सप्तम और अष्टम राशियों पर, बृहस्पति की पंचम, सप्तम और नवम राशियों पर और शनि की तृतीय और दशम राशियों पर पूर्ण दृष्टि होती है।

    अब पुनः प्रश्न यह उठता है कि क्या इनके सिवा अन्य राशियों पर भी दृष्टि होती है या नहीं। इसका निर्णय इस प्रकार किया गया है कि मंगल को छोड़कर शेष ६ ग्रहों को चतुर्थ और अष्टम राशियों पर तीन पाद (३) दृष्टि होती है, मंगल की चतुर्थ और अष्टम पर पूर्ण दृष्टि होती है जैसा कि ऊपर लिखा जा चुका है।

    इसलिए मंगल को तीन पाद (३) दृष्टि नहीं होती है। फिर भी लिखा है कि बृहस्पति के अतिरिक्त शेष ६ ग्रहों को नवम और पंचम राशि में द्विपाद दृष्टि होती है। स्मरण रहे कि बृहस्पति को नवीं और पांचवी पर पूर्ण दृष्टि होती है। अतएव वृहस्पति की द्विपाद (३) दृष्टि किसी राशि पर नहीं होती है।

    अंत में कहा है कि शनि के अतिरिक्त अन्य सभी ग्रहों को तृतीय और दशम राशि पर एकपाद (३) अर्थात् दृष्टि होती है। यहाँ भी शनि को तृतीय और दशम राशि में एकपाद दृष्टि नहीं कहा है क्योंकि इन पर इसकी पूर्ण दृष्टि होती है। यदि देखना चाहें कि किसी ग्रह की दृष्टि किस-किस राशि या राशियों पर होती है, तो उपरोक्त नियमों के अनुसार विचार करें।

    उदाहरण के तौर पर, सूर्य की पूर्ण दृष्टि सप्तम राशि पर होती है और यदि सप्तम राशि में अन्य ग्रह भी हैं, तो उन ग्रहों पर भी उसी ग्रह की दृष्टि होती है। इसी तरह, अन्य राशियों में भी ग्रहों पर उसी ग्रह की दृष्टि होती है जिनमें वे स्थित हैं। ऊपर लिखा जा चुका है कि अमुक ग्रह की अमुक राशि पर पूर्ण दृष्टि, त्रिपाद दृष्टि (३), द्विपाद दृष्टि (३) अथवा एकपाद दृष्टि (४) होती है। यदि उन राशियों में ग्रह भी रहते हैं, तो उन ग्रहों पर भी दृष्टि होती है।

    दृष्टि- चक्र

    ग्रहपूर्ण दृष्टित्रिपाद दृष्टिद्विपाद दृष्टिएकपाद दृष्टि
    रवि74, 89, 510, 3
    चंद्रमा74, 89, 510, 3
    बुध74, 89, 510, 3
    शुक्र74, 89, 510, 3
    मंगल7, 4, 8 9, 510, 3
    बृहस्पति7, 9, 54, 8 10, 3
    शनि7, 10, 34, 89, 5
    राहु7, 5, 9, 122, 103, 6, 4, 8
    केतु7, 5, 9, 122, 103, 6, 4, 8
  • ग्रहों की गणना और व्याख्या

    ग्रहों की गणना और व्याख्या

    पृथ्वी के साथ सात ग्रह हैं – सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि। राहु और केतु ग्रह नहीं हैं, वे केवल छाया ग्रह हैं। यूरोप में निवास करने वाले ज्योतिषी उन दो ग्रहों को मानते हैं, जो आधुनिक विज्ञान और खगोलविज्ञान (Astronomy) के आधार पर भी होते हैं।

    उन ज्योतिषियों ने आधुनिक विज्ञान और अन्य विज्ञानों के विकास पर भी निर्भर करके इन दो ग्रहों के फलाफल को महत्व दिया है। हालांकि, प्राचीन भारतीय ग्रंथों में यूरेनस और नेपच्यून का कोई उल्लेख नहीं है।

    उपरोक्त ग्रहों का प्रभाव रात्रि और दिन के समय पृथ्वी के चारों ओर माना जाता है। शनि सबसे दूरस्थ ग्रह है और इसलिए पृथ्वी की परिक्रमा या बारह राशियों का भ्रमण, शनि के लिए लगभग 10,759 दिन (लगभग 30 वर्ष) लेता है। शनि के पास निकटवर्ती ग्रह बृहस्पति है, जिसे इन दिनों की तारीखों में लगभग 4,332 दिन (लगभग 12 वर्ष) में एक बार भ्रमण करता है।

    बृहस्पति से निकटवर्ती मंगल है, जिसके लिए एक भ्रमण करने में लगभग 687 दिन लगते हैं। मंगल के बाद पृथ्वी आती है, जिसकी परिक्रमा लगभग 365 दिन (एक वर्ष) में होती है। इसके बाद शुक्र है, जो लगभग 225 दिनों में एक भ्रमण करता है। उसके बाद बुध है, जिसे लगभग 88 दिन में एक भ्रमण करते हैं। सबसे निकटवर्ती ग्रह चंद्रमा है, जो पूरी राशिमाला को 27 दिन 8 घंटों में भ्रमण करता है।

    ज्योतिष में उच्च और नीच स्थान

    राशिस्वामी
    5 सिंहसूर्य्य
    4 कर्कचन्द्रमा
    1 मेष मंगल
    8 वृश्चिक
    2 वृषभ शुक्र
    7 तुला
    3 मिथुनबुध
    6 कन्या
    9 धनु बृहस्पति
    12 मीन
    10 मकर शनि
    12 कुम्भ

    सौरमंडल का सफर

    पृथ्वी चलायमान है, जिसे हमारा धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण दोनों मानते हैं। पृथ्वी एक ग्रह है जो अपनी अक्षरेखा के चारों ओर घूमता हुआ सूर्य के चारों ओर चक्कर काटता है।

    इसके परिणामस्वरूप, हमारे लिए सूर्य की प्रतीक्षा में रात्रि और दिन होते हैं। सूर्य तारा है जो स्थिर रूप से अपनी स्थिति बनाए रखता है और पृथ्वी के चारों ओर घूमता हुआ दिखाई देता है। इसलिए, पृथ्वी सूर्य के आस-पास घूमने के कारण चलायमान है।

    चलो, हम एक सरल उदाहरण के माध्यम से इसे समझाते हैं। यह उदाहरण स्कूल के खेल के मैदान पर खेलते बच्चों के लिए है।

    सोचिए आप एक बच्चा हो और खेल के मैदान पर खड़े हो। तुम्हारे आस-पास दूसरे बच्चे भी खड़े हैं। आप खेल मैदान पर एक बैट लेकर खेल रहे हो।

    अब इस उदाहरण में, तुम खुद चलायमान हो, जबकि बैट अचल है। तुम मैदान के चारों ओर घूम रहे हो, जबकि बैट स्थिर है और उसकी स्थिति बदलती नहीं है। इस प्रकार, तुम खुद चल रहे हो, परंतु बैट स्थिर है।

    वैसे ही, पृथ्वी भी खुद चलायमान है और सूर्य अचल है। पृथ्वी अपनी अक्षरेखा के चारों ओर घूमती है, जबकि सूर्य स्थिर रूप से अपनी स्थिति बनाए रखता है। इस तरह, पृथ्वी चलायमान है, जबकि सूर्य अचल है।