ग्रहों के उच्च-नीच से जुड़ी रहस्यमयी बातें! ज्योतिष के अनोखे पहलू

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ग्रहों के आधार पर हमारे जीवन में विभिन्न प्रभाव देखे जाते हैं, और इनकी स्थिति राशि में उच्च या नीच होने के आधार पर उनके फल का निर्धारण किया जाता है। इस लेख में हम देखेंगे कि किस राशि के स्वामी ग्रह किस राशि में उच्च और नीच होते हैं, और उनके उच्च-नीच होने का अर्थ क्या होता है।

ज्योतिष ग्रंथों में यह बताया गया है कि कुछ ग्रह कुछ राशियों में उच्च और नीच होते हैं। उच्च ग्रह वह होते हैं जो राशि में उच्च होते हैं, उन्हें वहाँ बहुत बल मिलता है और उससे फल प्राप्त होता है। उदाहरण के तौर पर, सूर्य मेष राशि में उच्च होता है, चंद्रमा वृष राशि में, मंगल मकर राशि में, बुध कन्या राशि में, बृहस्पति कर्क राशि में, शुक्र मीन राशि में और शनि तुला राशि में।

इसी तरह, कुछ ग्रह सप्तम राशि में उच्च होने के बजाय नीच स्थान प्राप्त करते हैं। उच्च राशि के साथ सप्तम राशि में ग्रह का नीच स्थान होता है। जब ये ग्रह अपने उच्च स्थान से सप्तम राशि के इन भागों पर जाते हैं, तो उन्हें परम नीच कहा जाता है। इस प्रकार, सूर्य के लिए मेष की 10वीं भाग पर उच्च स्थान होता है और तुला की 10वीं भाग पर परम नीच स्थान होता है।

यह उच्च और नीच ग्रहों का नामकरण ग्रहों की विशेषता है, और इसका महत्वपूर्ण असर हमारे जीवन पर पड़ता है। यहाँ उच्च ग्रह को “तुंग” भी कहा जाता है। उच्च ग्रहों के उच्चतम स्थानों की जानकारी होने से हम अपने जीवन में उच्चता और संपन्नता को प्राप्त कर सकते हैं।

यह एक गहरी विषय है और इसका विश्लेषण करना मुश्किल है। लेकिन ज्योतिष विद्या के अनुसार, इसे ठीक से समझने से हमें अपने भविष्य में उपाय और संशोधन करने की संभावना होती है। ग्रहों की ऊँचाई और निम्नता को समझकर हम अपने जीवन की दिशा और उन्नति पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

ज्योतिष में उच्च और नीच ग्रहों का अध्ययन शुभ फलों और अनुकूलता की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उच्च ग्रहों का उच्चतम स्थान होने से उनकी शक्ति और प्रभाव बढ़ जाता है, जबकि नीच ग्रहों का मन्दोच्च स्थान होने से उनकी प्रभावशाली गुणवत्ता कम हो जाती है। इस प्रकार, ग्रहों के उच्च-नीच होने से हमारे जीवन को प्रभावित करने वाले विभिन्न क्षेत्रों में अंतर्निहित शक्ति और संभावनाएं होती हैं।

इस विषय में कई तरह की मताएं हैं और इस पर चर्चा करने से बहुत सारे संदेह और विपर्यय उत्पन्न हो सकते हैं। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि हम विभिन्न संस्थानों और ग्रंथों के माध्यम से सत्य और तथ्य की जांच करें और सही ज्ञान प्राप्त करें। ग्रहों का उच्च-नीच होना हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रभाव डाल सकता है, और इसलिए उनके अध्ययन का महत्वपूर्ण स्थान हमारे ज्योतिष विद्या में है।

ग्रहों का उच्च-नीच होना

ग्रहराशिस्वामी उच्चस्थानपरमोच्च अशनीच स्थानपरम नीच अंशमूलत्रिकोण
सूर्य्य (र)सिंह (5)मेषमेष 10तुलातुला 10सिंह 1-10 अंश
चन्द्रमाकर्क(4)मेष 10तुलातुला १०२० अंशवृष 4-30 अंश
मङ्गल(मं)मेष (1), वृश्चिक (8)मकरमकर 28कर्ककर्क 5मेष 1-18 अंश
बुध (बु)मिथुन(3), कन्या (6)कन्याकन्या 15मीनमीन 15कन्या 16-20 अंश
वृहस्पतिधन(9),मीन (12)कर्ककर्क 5मकर २८मकर 5 धन 1-13 अंश
शुक्र (शु)वृष(2),तुला (7)मीनमीन 27कन्याकन्या 27तुला 1-10 अंश
शनि (श)मकर(10), कुम्भ(11)तुलातुला (20)मीन/मेषमेष(20)कुम्भ 1-2० अंश
राहु (रा)मेष (1), कन्या (6)वृष,मिथुन  वृश्चिक,धनवृष
केतु (के)तुला (7)वृश्चिक,धन  वृष,मिथुनकर्क

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